दूर – संचार में क्रांति- निबंध

प्रस्तावना-

दूरसंचार के क्षेत्र में उन्नति से मानव जीवन की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव पड़ा है यह सर्वविदित है.कि आज हम संपर्क युग में रह रहे हैं.दूरसंचार के विकास ने मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को अपने दायरे में ले लिया है.प्राचीन काल में संदेशों के आदान-प्रदान में बहुत अधिक समय तथा धन लग जाया करता था.परंतु आज समय और धन दोनों की बड़े पैमाने पर बचत हुई है.दूरसंचार के क्षेत्र में ने तकनीकी से आप टेलीफोन सेल्यूलर फोन फैक्स और ईमेल द्वारा क्षणभर में ही किसी भी प्रकार के संदेश एवं विचारों का आदान प्रदान किया जा सकता है.आज चंद्रमा तथा अन्य ग्रहो से सम्प्रेषित संदेश पृथ्वी पल भर में ही प्राप्त किया जा सकते हैं.दूरसंचार ने पृथ्वी और आकाश की संपूर्ण दूरी को समेट लिया है.

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दूरसंचार का मानव जीवन में महत्व-

मानव जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में दूर-संचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.सूचनाओं के आदान- प्रदान करने में समय की दूरी घट गई है.अब क्षणभर में संदेश विचारों का आदान -प्रदान किया जा सकता है.शिक्षा चिकित्सा परिवहन तथा उद्योग आदि के क्षेत्र में दूर-संचार का महत्व बढ़ गया है.अपराधों पर नियंत्रण करने तथा शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में दूर-संचार का विशेष योगदान है.दूर- संचार के अभाव में देश में शांति और सुव्यवस्था करना कठिन कार्य है.व्यावसायिक क्षेत्र में भी सही समय पर सूचनाओं का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.अतः कहा जा सकता है.कि किसी भी राष्ट्र के लिए वहां की दूर -संचार व्यवस्था का विकसित होना अत्यावश्क है.

उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में दूर-

संचार का योगदान- किसी भी देश का विकास उनकी सुदृढ अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है.उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाता है.लेकिन सफल व्यवसाय और उद्योगों के विकास के लिए दूरसंचार की अत्यधिक आवश्यकता होती है.भूमंडलीकरण के इस काल में तो व्यवसाय एवं उद्योगपति सूचनाओं के माध्यम में व्यवसाय एवं उद्योग में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए लालायित है.सूचनाएं व्यवसाय का जीवन रक्त है.व्यवसाय के अंतर्गत माल के उत्पादन से पूर्व उत्पादन से वितरण और विक्रयोपरान्त सेवाएं प्रदान करने के लिए दूरसंचार का महत्वपूर्ण स्थान है.संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास परिषद की रिपोर्ट के अनुसार दूर-संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विदेशी निवेश प्राप्त करने के मामले में भारत अग्रणी देश बनता जा रहा है.रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ष 2000 में दक्षिण एशिया में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारत का हिस्सा 76% था चीन में भारत से ज्यादा मोबाइल फोन है.लेकिन इंटरनेट के क्षेत्र में व व्यवसायिक गतिविधियों का लाभ उठाने के लिए भारत का चीन से कई दूरसंचार में क्रांति ने आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की नई संभावना को जन्म दिया है.जिसका लाभ विकसित और विकासशील देश दोनों ही उठा रहे हैं.

भारत में दूर-संचार का विकास-

भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में सीमित उन्नति की है.भारत का दूरसंचार नेटवर्क एशिया के विशालतम दूरसंचार नेटवर्क ओं में गिना जाता है.भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण( ट्राई) की जनवरी सन 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 120.38 करोड हो गई है.इनमें लैंडलाइन उपभोक्ताओं की संख्या 228.1 लाख के लगभग है. भारतीय दूरसंचार नेटवर्क चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है.आज लगभग सभी देशों के लिए इंटरनेशनल सब्सक्राइब टाइमिंग सेवा उपलब्ध है.एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में फरवरी सन 2019 तक इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 56 करोड़ को पार कर गई है.जिसके साल के अंत तक 62.7 करोड तक पहुंचने का अनुमान है अंतरराष्ट्रीय संचार क्षेत्र में उपग्रह संचार और जल के नीचे से स्थापित संचार संबंन्धो द्वारा अपार प्रगति हुई है.ध्वनिवाली और ध्वनिरहित दूर-संचार सेवाएं जिनमें आंकड़ा प्रेषण, फैसीपाइल, मोबाइल रेडियो रेडियो पेनिंग और लीज्ड लाइन सेवाएं शामिल है.

प्राथमिक सेवा-

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की सिफारिशें के अनुरूप सरकार ने 25 जनवरी 2001 ई० को लाइसेंस देने के लिए दिशा निर्देश जारी किए.जिनके अनुसार ने प्रथमिक सेवा उपलब्ध कराने वाले बिना किसी प्रतिबंध के सभी सेवा क्षेत्रों में खुला प्रवेश कर सकते हैं.इन दिशा निर्देशों के अनुसार स्थानीय क्षेत्रों में प्रथमिक टेलीफोन सेवा के उपभोक्ताओं के लिए वायरल सबस्क्राइबर प्रणालियों के अंतर्गत भी हाथ वाले टेलीफोन सेट प्रयोग करने की छूट है.

सेल्यूलर मोबाइल टेलीफोन सेवा-

सभी महानगरों और 29 राज्यों के लगभग सभी शहरों के लिए सेवाएं शुरू हो चुकी है.जनवरी 2019 ई० तक देश में 118.34 करोड मोबाइल उपभोक्ता नई दूरसंचार नीति के अंतर्गत सेल्यूलर सेवा के मौजूद लाइसेंस धाराओं को 1 अगस्त 1999 ई० से राजस्व भागीदारी प्रणाली अपनाने की अनुमति मिल गई. देश के विभिन्न भागों में सेल्यूलर मोबाइल टेलीफोन सेवा चलाने के लिए एम० टी० एन० एल० और बी० एस० एन०एल० को लाइसेंस जारी किए गए नए नीति के अनुसार सेल्यूलर ऑफरेटरो को यह छूट दी गई है.कि वे अपने कार्य क्षेत्रों में सभी प्रकार की मोबाइल सेवा जिनमें दामिनी और गैर जाने संदेश शामिल है.डाटा सेवा और पी०सी०ओ० उपलब्ध करा सकते हैं.

इंटरनेट सेवा-

नवंबर 1998 ईस्वी से इंटरनेट सेवा निजी भागीदारी के लिए खोल दी गई. अब इसके लाइसेंस को पहले 5 साल तक के लिए शुल्क मुक्त किया जा चुका है.और अगले 10 सालों के लिए ₹1 रुपया प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है.भारत में पंजीकृत कोई भी कंपनी लाइसेंस प्राप्त कर सकती है.और इसके लिए पहले से भी किसी अनुभव की आवश्यकता नहीं होगी.अब तक 506 आई०एस०पी० (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) लाइसेंस जारी किए गए हैं.31 मार्च 2018 तक भारत में 412 .7 मिलियन लोग इंटरनेट से जुड़ी ब्रांडबैण्ड सेवा का उपयोग कर रहे हैं.सरकार ने देश की प्रत्येक पंचायत में वर्ष सन् 2022 तक ब्रॉडबैण्ड सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. व्यावसायिक साइटों को इंटरनेट पर लॉच किया जा चुका है.ई-मेल के द्वारा मास कैम्पेन चलाना अब एक सामान्य प्रचलन हो चुका है.चैक एक ऐसी उपलब्धि सेवा है.जिसके द्वारा इंटरनेटधारक एक- दूसरे के साथ आपस में ऑनलाइन वार्तालाप कर सकते हैं. ई-गवर्नैस सरकार की पहली प्रथमिकता है.

उपसंहार-

वास्तव मैं में दूर-संचार प्रणाली ने विश्व की दूरियों को समझते हुए मानव जीवन को एक नया मोड़ दिया है.आज हमारा देश दूर-संचार टेक्नोलॉजी की दौड़ में निरंतर आगे बढ़ रहा है.विभिन्न ने निजी कंपनियों का भी इसमें विशेष योगदान रहा है.जिसके कारण देश के कोने-कोने से जोड़ने में सफल हुए है.इस प्रकार दूर-संचार के प्रसान शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन ,व्यवसाय तथा उद्योग के विकास के साथ-साथ माना जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति को गति प्रदान किए हैं.

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