5 शायरी | Best Shayari ( दो कदम और सही ) | Do Kadam Aur Sahi

दो कदम और सही ( Do Kadam Aur Sahi )
 

 ( एक  )

जुल्फ बन कर बिखर गया मौसम ,

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धुप को छाव कर गया मौसम ……

 

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मैंनेपूछी थीखैरियत तेरी ,

मुस्करा कर गुजर गया मौसम …..

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फिर वो चेहरा नजर नही आया ,

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फिर नजर से उतर गया मौसम ….

 

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तितलियाँ बन के उड़ गयी रातें ,

नींद को ख्वाब कर गया मौसम ….

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तुम न थे तो मुझे पता न चला ,

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किधर आया किधर गया मौसम ….

 

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( दो )

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दिल बुरी तरह से धड़कता रहा ,

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वो बराबर मुझे ही तकतारहा …..

 

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रोशनी सारी रात कम ना हुई ,

तारा पलकों पे एक चमकता रहा …..

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छू गया जब कभी ख्याल तेरा ,

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दिल मेरा देर तक धड़कता रहा …..

 

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कल तेरा जिक्र छिड़ गया घर में ,

और घर देर तक महकता रहा ….

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उसके दिल में तो कोई मेल न था ,

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मैं खुदा जाने क्यूँ झिझकता रहा ….

 

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मीर को पढ़ते पढ़ते सोया था ,

रात भर नींद में सिसकता रहा …..

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( तीन ) 

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बेवफा होगा , बावफा होगा ,

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उससे मिलकर तो देख क्या होगा …..

 

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बैर मत पालिए चरागों से …

दिल अगर बुझ गया तो क्या होगा …

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सर झुका कर जो बात करता है 

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तुमसे वो आदमी बड़ा होगा …

 

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कहकहे जो लुटा रहा था कभी,

वो कहीं छुप के रो रहा होगा …..

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उससे मिलनाकहाँ मुकद्दर है,

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और जी भी लिए तो क्या होगा …..

 

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राहत एक शब में हो गए है रईस,

कुछ फकीरों से मिल गया होगा …

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( चार )

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अब ना मैं वो हूँ .. ना बाकी हैं ज़माने मेरे …

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फिर भी मशहूर है शहरों में फ़साने मेरे ….

 

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जिंदगी है तो नए जख्म भी लग जायेंगे 

अब भी बाकी है कई दोस्त पुराने मेरे …..

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आपसे रोज मुलाकात की उम्मीद नहीं 

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अब कहाँ शहर में रहते है ठिकाने मेरे ….

 

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उम्र के खुदा  ने साँसों का धनुष तोड़ दिया 

मुझ पे एहसान किया आज राम ने मेरे ….

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आज जब सो के उठा हूँ, तो ये महसूस हुआ 

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सिसकियाँ भरता रहा कोई सिरहाने मेरे …

 

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( पांच )

 

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तू शब्दों का दास रे जोगी …

तेरा क्या विश्वास रे जोगी …

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इक दिन विष का प्याला पी जा ….

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फिर न लगेगी प्यास रे जोगी ..

 

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ये साँसों का बंदी जीवन ..

किसको आया रास रे जोगी ..

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विधवा हो गयी साड़ी नगरी …

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कौन चला बनवास रे जोगी …

 

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पुर आई थी मन की नदिया 

बह गए सब एहसास रे जोगी …

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एक पल के सुख की क्या कीमत ..

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दुःख है बारह मास रे जोगी …

 

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बस्ती पीछा कब छोड़ेगी ..

लाख धरे सन्यास रे जोगी ….

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