अनियंत्रित भ्रष्टाचार: कारण और निवारण

प्रस्तावना भ्रष्टाचार से आशय

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भ्रष्टाचार शब्द संस्कृत के भ्रष्ट शब्द के साथ आचार् शब्द के योग से निशष्पन्न हुआ है.भ्रष्ट का अर्थ हैअपने स्थान से गिरा हुआ अथवा विचलित और आचार का अर्थ है. आचरण व्यवहार इस प्रकार इस प्रकार किसी व्यक्ति द्वारा अपनी गरिमा से गिरकर अपने कर्तव्यों के विपरीत किया गया आचरण, भ्रष्टाचार है.

भ्रष्टाचार के विविध रूप

वर्तमान में भ्रष्टाचार इतना व्यापक है.कि उसके विविध रूप देखने में आते हैं जिनमें से कुछ मुख्य प्रकार है.

  1. रिश्वत(सुविधा शुल्क)- किसी कार्य करने के लिए किसी सक्षम व्यक्ति द्वारा लिया गया उपहार सुविधा अथवा नकद धनराशि को रिश्वत कहा जाता है.इसी को साधारण भाषा में घूसऔर सभ्य भाषा में सुविधा शुल्क भी कहा जाता है.अपने कार्य अपने से और बिना किसी परेशानी के कराने के लिए अथवा नियमों के विपरीत कार्य करने के लिए आज आज लोग सहषृृ रिश्वत देते हैं.2
  2. भाई भतीजावाद- किसी सक्षम व्यक्ति द्वारा केवल अपने सगे संबंधियों को कोई सुविधा लाभ अथवा पद (नौकरी )प्रदान करना ही भाई भतीजावाद है.आज नौकरियों तथा सरकारी सुविधाओं अथवा योजनाओं के क्रियान्वयन के समय समर्थन (अधिकारी/ नेता) लोग अपने बेटा -बेटी भाई भतीजा आदि सगे सबंधियों को लाभ पहुंचाते है.
  3. कमीशन – किसी विशेष उत्पाद (वस्तु) अथवा सेवा के सौदो में किसी सक्षम व्यक्ति द्वारा सौदो के बदले में विक्रेता सुविधा प्रदाता से कुल सौदो के मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत प्राप्त करना कमीशन है.आज सरकारी अर्द्ध- सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र के अधिकांश सौदो अथवा ठेकों में कमीशनबाजी का वर्चस्व है.
  4. यौन शोषण- यह भ्रष्टाचार का सर्वथा नवीन रूप है.इसमें प्रभावशाली विपरीत लिंक के व्यक्ति को अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले उसका यौन शोषण करता है.

भ्रष्टाचार के कारण-, भष्टाचार के , यद्यपि अनेकानेक कारण है जिनमे से कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार है-

  1. महात्मा गांधी-, शिक्षा की व्यवसायीकारण, उसे अत्यधिक महंगा कर दिया है, आज जब एक युवा शिक्षा पर लाखों रुपए खर्च करके किसी पद पर पहुंचता है.तो उसका सबसे पहला लक्ष्य यह होता है.कि उसने अपनी शिक्षा पर जो खर्च किया है.उसे किसी भी उचित अनुचित रूप से ब्याजसहित वसूल . उसकी की यह सोच उसे भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल देती है.और फिर वह चाहकर भी इस से निकल नहीं पाता.
  2. लचर न्याय व्यवस्था-लचर न्याय व्यवस्थ,भी, भ्रष्टाचार का एक मुख्य कारण है प्रभावशाली लोग अपने धन और भुजबल के सहारे अरबों खरबों के घोटाले करके साफ बच निकलते हैं जिससे युवा वर्ग इस बात के लिए प्रेरित होता है कि यदि व्यक्ति के पास पर्याप्त धन बल है तो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता बस यह धारणा उसे अकूत धन प्राप्त करने के लिए भ्रष्टाचार के अंधी गली में धकेल देती है जहां से वह फिर कभी निकल नहीं पाता.
  3. जन-जागरण का अभाव- हमारे देश की बहुसंख्यक जनता अपने अधिकारों से अनभिज्ञ है.जिसका लाभ उठाकर प्रभावशाली लोगों उसका शोषण करते रहते हैं.और जनता चुपचाप भ्रष्टाचार की चक्की पिसती रहती है.
  4. जीवन मूल्यों का ह्रास और चारित्रिक पर – आज व्यक्ति के जीवन से मानवीय मूल्यों को का इतना, ह्रास रासहो गया है.कि उसे उचित अनुचित का भेजी दिखाई नहीं देता जीवन मूल्यों के इसी ह्रास ने व्यक्ति का इतना चारित्रिकय पतन कर दिया है.कि उसे अन्य लोगों के हितों की तो आशा ही नहीं की जा सकती है , ऐसे मूल्य हिना दुश्चरित्र व्यक्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं.

भ्रष्टाचार दूर करने के उपाय-, भ्रष्टाचार को दूर करने के कुछ मुख्य उपाय इस प्रकार हैं-

  1. जनान्दोलन- भ्रष्टाचार को रोकने का सबसे मुख्य और म हत्वपूर्ण उपाय जनान्दोलन है जनान्दोलन के द्वारा लोगों को उनके अधिकारों का ज्ञान स्वयं आकर इस पर अंकुश लाया जा सकता है
  2. कठोर कानून-, कठोर कानून बनाकर ही भ्रष्टाचार पर रोक लगाया जा सकती है.यदि लोगों को पता हो कि भ्रष्टाचार करने वाला कोई भी व्यक्ति सजा से नहीं बच सकता तो प्रत्येक व्यक्ति अनुचित कार्य करने से पहले हजार बार सोचेगा.
  3. नि:,शुल्क उचित शिक्षा-, भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश तभी लगाया जा सकता है.जब देश के प्रत्येक युवा नि:शुल्क उच्चशिक्षा का अधिकार प्राप्त होगा, यद्यपि अभी ऐसा किया जाना संभव नहीं दिखता तथापि 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करना इस दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है.
  4. पारदर्शिता-, दिश, और जनहित के प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता लाकर भी भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है.क्योंकि अधिकांश भ्रष्टाचार गोपनीयता के नाम पर ही होता है.
  5. कार्यस्थल पर व्यक्ति की सुरक्षा और संरक्षण-, कार्यस्थल पर प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकार और कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कार्य करने के लिए आवश्यक है.कि उसे पर्याप्त सुरक्षा तथा संरक्षण प्राप्त हों जिससे व्यक्ति निडर होकर अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी के साथ कर सके यदि कार्यकारी व्यक्ति को पूरी सुरक्षा और संरक्षण मिले तो धनबल और बाहुबल का भय दिखाकर कोई भी व्यक्ति अनुचित कार्य करने के लिए किसी को विवश नहीं कर सके.महिलाकर्मियों के लिए तो कार्यस्थल पर सुरक्षा और संरक्षण देने हेतु कानून बनाया चुका है.जिससे उसका यौन- शोषण रोका जा सके, यद्यपि इस कानून को और अधिक व्यापक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है.
  6. नैतिक मूल्यों की स्थापना-, नैतिक मूल्यों की स्थापना करके भी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है.इसके लिए समाज सुधारको और धर्म पर प्रचारको के साथ-साथ शिक्षक वर्ग को भी आगे आना चाहिए.

उपसंहार-, हम तभी विकसित देशों की श्रेणी में सम्मिलित हो सकते हैं.जब भ्रष्टाचार के क्षेत्र में न्यायिक तराजू पर राजा और रंक एक ही पकडे में रखे जाएं.भ्रष्टाचार पर कठोर कदम उठाए जाएं और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन जागरण हो.

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