Rajasthan High Court:”बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो फीस भी दे” हाई कोर्ट का फरमान, 2 मिनट में जाने क्या है पूरी खबर

Rajasthan High Court: नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए राजस्थान से जुड़ी एक खबर लेकर उपस्थित हुए हैं। इस खबर के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि अभी फिलहाल छात्रों की पटीशन को लेकर हाईकोर्ट ने क्या कहा और अभी फिलहाल क्या स्थिति बनी हुई है, पूरी खबर जानने के लिए अंत तक बने रहे….

दरअसल पूरा मामला यह है कि राजस्थान में फीस जमा नहीं करने को लेकर अभिभावकों और प्राइवेट स्कूल संचालकों के बीच कुछ विवाद हो गया था जिसके बाद स्कूल संचालकों ने जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने से वंचित कर दिया था।Rajasthan High Court

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जिसके बाद बच्चों तथा अभिभावकों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर यह कहा था कि हमें फीस जमा नहीं करने की वजह से परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

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इसी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद फीस के मानक तय किए हैं इसलिए अभिभावकों को पूरी फीस या किस्तों में भुगतान जरूर करना होगा। अगर आप अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो आपको फीस भी भरनी होगी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक गौड़ा की तरफ से की गई।Rajasthan High Court

पूरा मामला इस प्रकार था कि अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की फीस जमा नहीं हुई थी इसकी वजह से उन्हें एग्जाम में शामिल नहीं किया गया था जिसको लेकर स्टूडेंट्स ने पिछले साल यानी 3 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी याचिका में जिक्र किया गया था कि उन्हें फीस जमा नहीं होने के कारण ऑफलाइन या ऑनलाइन परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया था कि कोरोनावायरस स्कूल ऑफलाइन नहीं संचालित किए जा रहे हैं इसलिए फीस जमा करने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट में कहा था कि स्कूल संचालित करने के लिए संसाधनों और मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है जिसमें पैसा भी खर्च होता है इसलिए अभिभावकों को फीस का कुछ हिस्सा जरूर जमा कराना पड़ेगा।

वसूली जाएगी फीस[Rajasthan High Court]

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बकाया फीस देने के लिए समय भी दिया था और बकाया नहीं देने पर स्कूल को रिकवरी के लिए भी निर्देश दिए गए थे। इसके बाद अदालत ने स्टूडेंट्स को स्टे देने से साफ मना कर दिया था। अभिभावकों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी जिसको हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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