कवियों का साहित्यिक परिचय एवं कृतियाँ- मैथिलीशरण गुप्त

जीवन- परिचय-

श्री मैथिलीशरण गुप्त का जन्म चिरगांव जा (झांसी )में सन्1886 ई०(संवत्1943) में हुआ था.इनके पिता सेठ रामशरण गुप्त को हिंदी साहित्य से विशेष प्रेम था.गुप्त जी की शिक्षा दीक्षा घर पर ही संपन्न हुई घर के साहित्यिक वातावरण के कारण इन काव्य के प्रति  अभिरुचि को जाग्रत हुई. 12 दिसतंबर सन् 1964 ई०(सवत्2021) में गुप्तजी का देहांवसान हो गया.

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साहित्यिक- परिचय-

मैथिलीशरण गुप्त में बाल्यावस्था से ही काव्यात्मक प्रवृत्ति विद्यमान थी.यह अल्पावस्था से ही छिट -पुट काव्य रचनाएं करते थे.आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपर्क में आने के पश्चात उनकी प्रेरणा से काव्य रचना करके इन्होंने हिंदी काव्य की धारा को समृद्ध किया.इनकी कविता में राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्रप्रेम का स्वर प्रमुख रूप से मुखरित हुआ है. इसी कारण हिंदी साहित्य के तत्कालीन विद्वानों ने इन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि से विभूषित किया.आचार्य द्विवेदी से संपर्क होने के पश्चात मैथिली शरण गुप्त की रचनाएं सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित होने लगी.इनकी प्रथम पुस्तक रंग में भंग का प्रकाशन सन् 1909 में हुआ.  किंतु इन्होंने ख्याति सन् 1912 ई० में प्रकाशित पुस्तक भारत- भारती के   पश्चात ही  मिलनी प्रारंभ हुई.इसी पुस्तक ने इन्हें राष्ट्र कवि के रूप में विख्यात किया.गुप्तजी प्रमुख रूप से प्रबंध कवि की रचना में सिद्धहस्त थे.खड़ीबोली के स्वरूप का निर्धारण करने एवं उनके विकास में गुप्तजी ने अपना अमूल्य योगदान दिया है.प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय भाव की अपने काव्य में प्रस्तुति कर इन्होंने युग धर्म का निर्वाह किया.और अतीत के आदर्शों को वर्तमान की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया ये द्विवेदी युग के सबसे अधिक लोगप्रिय कवि माने जाते हैं.

कृतियाँ- गुप्त जी की रचनाएं दो प्रकार की है-                  

(क) अनुदित (ख)मौलिक उनका  साहित्य विशाल है.और    विषय- क्षेत्र बहुत विस्तृत                                                       

(क) मौलिक रचनाएं- इनकी प्रमुख मूली की रचनाएं निम्नलिखित है-

  1. भारत- भारती- इनमें देश के प्रति गर्व और गौरव की भावनाओं पर आधारित कविताएं है.इसी रचना के कारण वे राष्ट्र कवि के रूप में विख्यात हुए.
  2. साकेत – श्री रामचरित्रमानस के पश्चात हिंदी में राम काव्य का दूसरा स्तंभ मैथिलीशरणगुप्त द्वारा रचित साकेत ही है.
  3. यशोधार – इनमें उपेक्षित यशोधार के चरित्र को काव्य का आधार बनाया गया है. गुप्त जी की अन्य प्रमुख पुस्तकें जयंद्रथ-वध, झंकार,सिद्धाराज, कुणाल गीत, अनघ, पंचवटी, द्वापर, नहुष, पृथ्वीपुत्र, तथा प्रदक्षिणा आदि है.

(ख)  अनुदित रचनाएं-  प्लासी का युद्ध,  मेघनाद- वध वृत्र- संहार आदि.

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