भारतीय शिक्षा का इतिहास एवं विकास -महत्वपूर्ण प्रश्न 65

शिक्षा के संदर्भ मैं अपव्यय तथा अवरोधन में क्या संबंध है ? अथवा शिक्षा के क्षेत्र में अपव्यय व्यय एवं अवरोधन का क्या अर्थ है?

उत्तर – शिक्षा की प्रगति एवं विस्तार को प्रभावित करने वाले दो कारक क्रमश: अपव्यय तथा अवरोधन है। ‘अपव्यय’ की स्थिति में बालक किसी स्तर की शिक्षा को पूरा करने से पहले ही शिक्षा से अलग हो जाता है अर्थात विद्यालय छोड़ देता है। इसके परिणाम स्वरूप संबंधित छात्र का समय धन एवं श्रम व्यर्थ हो जाता है। इससे  भिन्न ‘अवरोधन’ के अंतर्गत छात्र पूरा वर्ष अध्ययन करके भी शेक्षिक स्तर से उन्नत नहीं होता अर्थात परीक्षा में अनुत्तीर्ण होकर उसी कक्षा में पुनः एक वर्ष के लिए रह जाता है। इस स्थिति में भी धन, समय श्रम व्यर्थ जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि अवरोधन में निश्चित रूप से अपव्यय भी निहित होता है, भले ही उसे अप्रत्यक्ष अपव्यय कहा जाए। वास्तव में ‘अपव्यय’ तथा ‘अवरोधन’ को शैक्षिक क्षय के दो पहलू कहां जा सकता है।

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